

बलौदाबाजार, 26 अप्रैल 2026 — इतिहास की धुंध से निकलकर सामने आई एक अनमोल विरासत ने जिले को गौरवान्वित कर दिया है। सिमगा विकासखंड के कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा स्थित सदगुरु कबीर आश्रम में सर्वेक्षण के दौरान लगभग 326 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियाँ मिली हैं, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत गवाही देती हैं।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में चल रहे “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई। इन दुर्लभ ग्रंथों का डिजिटल संरक्षण “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से किया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी इस धरोहर से जुड़ सकें।
दामाखेड़ा आश्रम में कुल चार प्राचीन पांडुलिपियाँ — अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश — का सर्वेक्षण कर डिजिटलीकरण किया गया। ये सभी ग्रंथ 9वें आचार्य प्रगट नाम साहब द्वारा रचित हैं और देवनागरी लिपि में लिखे गए हैं। इनकी भाषा, शैली और विषयवस्तु उस दौर की आध्यात्मिक चेतना और ज्ञान परंपरा को उजागर करती है।
इतना ही नहीं, सोनाखान स्थित संग्रहालय में भी एक ऐतिहासिक दस्तावेज मिला — 10 दिसम्बर 1857 को अंग्रेजी शासन द्वारा जारी शहीद वीर नारायण सिंह की फांसी का आदेश। यह दस्तावेज स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है, जो उस दौर के संघर्ष और बलिदान को याद दिलाता है।
इस अवसर पर एसडीएम सिमगा अतुल शेट्टे ने सरपंच की उपस्थिति में कबीर पंथी दयाशंकर को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया, जिससे स्थानीय सहभागिता और गर्व की भावना और भी प्रबल हुई।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिलेवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि —
“आपके घरों में भी इतिहास की अनमोल धरोहर छिपी हो सकती है। यदि आपके पास कोई प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ, ताम्रपत्र या ताड़पत्र हो, तो उसे साझा करें। हम केवल उसका डिजिटल रिकॉर्ड बनाएंगे, मूल प्रति आपके पास ही सुरक्षित रहेगी।”
यह अभियान न सिर्फ अतीत को संजोने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।





